जबलपुर। प्रेम होना ही सबसे बड़ी सफलता है कोई असफल कैसे हो सकता है प्रेम में…..,चंदा का चेहरा है….,निर्मम कुम्हार की थापी से… जैसे काव्य रस से सराबोर माहौल ने सभी को आनंदित कर दिया। अवसर था कालजयी अनिल कुमार श्रीवास्तव फाउंडेशन द्वारा लोक रंग, संगीत और कविताओं के अनोखे संयोजन “अक्षर” के आयोजन का। रानी दुर्गावती संग्रहालय स्थित कला वीथिका में हुए आयोजन में अतिथियों का स्वागत संस्था की अध्यक्ष डॉ राजलक्ष्मी त्रिपाठी ने किया। संस्था का प्रतिवेदन सचिव आकृति श्रीवास्तव ने दिया।
शुरुआत ” हमाई बुंदेली” से हुई। जहां दमोह से आए बुंदेली कवि रमेश तिवारी और जबलपुर के बुंदेली कवि आशुतोष द्विवेदी ने बुंदेली कविताओं का पाठ किया। आयोजन के अगले चरण ” काव्य संध्या” में कविताओं का पाठ किया गया। जहां प्रयागराज से आए युवा कवि केतन यादव, प्रयागराज की ही युवा कवियत्री रूपम मिश्रा, भोपाल के रंगकर्मी,कवि हेमंत देवलेकर और जबलपुर की युवा कवियत्री बाबुषा कोहली ने ठंड की सुहानी शाम में काव्य रसधारा प्रवाहित कर श्रोताओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम भाग “कविता ताल”में शहर के तबला वादक लोकेश मालवीय ने अलंकृति श्रीवास्तव के साथ कविताओं और तबले की जुगलबंदी प्रस्तुत की। जिसमें देश भर के जाने माने कवि जैसे अनिल कुमार श्रीवास्तव, इब्ने इंशा, शिवमंगल सिंह सुमन के साथ ही प्राचीन हिंदी के कवि पद्माकर और भूषण की कविताओं को शामिल किया।
संचालन कवि विवेक चतुर्वेदी ने किया। आभार प्रदर्शन संस्था के आदित्य श्रीवास्तव ने किया।


