मूल बनावट में बदलाव कर व्यावसायिक इस्तेमाल की शिकायतें; RTO ने अभियान चलाकर कार्रवाई की बात कही
जबलपुर। शहर की सड़कों पर कुछ वाहन अब केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों का जरिया भी बनते नजर आ रहे हैं। तीन और चार पहिया वाहनों के मूल स्वरूप में बदलाव कर कहीं रेस्टोरेंट या चलते-फिरते किचन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है, तो कहीं वाहन को सैलून के रूप में उपयोग किए जाने की बात कही गई है।
सिविक सेंटर समेत शहर के कई इलाकों में ऐसे वाहनों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। वहीं एम्पायर टॉकीज चौराहे के आसपास एक चार पहिया वाहन के सैलून के रूप में नजर आने का उल्लेख है। डिलीवरी और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भी वाहनों के मूल स्वरूप में बदलाव किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
हजारों मॉडिफाइड वाहनों का दावा, आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 10 हजार दोपहिया, 2 हजार चार पहिया और 3 हजार अन्य वाहनों के मूल स्वरूप में बदलाव किए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दोपहिया वाहनों में बदलाव के लिए रसल चौक, नागरथ चौक और बर्न कंपनी-कांचघर रोड के आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। वहीं चार पहिया वाहनों के मामले में रसल चौक, पुराना बस स्टैंड, हाट बाजार, राइट टाउन, रामपुर, गोहलपुर और अधारताल जैसे इलाकों का उल्लेख है।
RTO ने कहा- अभियान चलाकर होगी कार्रवाई
RTO रिंकु शर्मा के अनुसार, विभाग की ओर से किसी भी वाहन को मॉडिफाई करने की अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वाहन के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
डिलीवरी से जुड़े कुछ वाहनों में भी बिना अनुमति बदलाव किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, कुछ वाहनों के पास जरूरी अनुमति होने की जानकारी भी है। ऐसे में दस्तावेज और वाहन की वास्तविक बनावट का सत्यापन किए जाने की जरूरत है, ताकि अनुमत बदलाव और अनधिकृत मॉडिफिकेशन के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
नियमों को लेकर क्या कहते हैं अधिवक्ता?
अधिवक्ता अनिल सिंह चौहान के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 52 वाहन के पंजीकृत विवरण और मूल बनावट में बदलाव से संबंधित प्रावधान रखती है। उनके अनुसार, निर्धारित नियमों के विरुद्ध किया गया परिवर्तन कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए वाहन में बदलाव से पहले संबंधित नियमों, तकनीकी सुरक्षा मानकों और आवश्यक अनुमतियों का पालन जरूरी है।
अब निगाह इस बात पर है कि परिवहन विभाग का प्रस्तावित अभियान कब शुरू होता है और नियमों के उल्लंघन वाले वाहनों पर क्या कार्रवाई होती है।




