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सपने देखते रहो वो सच होते हैं एक दिन

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शहर के युवा अभिनेता, निर्देशक कैप्टन सचिनखन्ना की फिल्म को न्यूयार्क और सेनफ्रांसिको में मिले अवॉर्ड, शहर को दिलाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
जबलपुर। सपने देखना चाहिए और साथ ही उन्हें पूरा करने की कोशिश भी निरंतर करते रहना चाहिए क्योंकि एक न एक दिन वो सच जरूर होंगे। ये कहना है शहर के युवा अभिनेता, फिल्म निर्देशक कैप्टन सचिनखन्ना का। जिनकी फिल्म “द सोसाइटी ऑफ गुड ह्यूमेंस” को न्यूयार्क और सेनफ्रांसिस्को में वर्ष 2025 के दो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया। फिल्म को इजिप्शियनअमेरिकन फिल्म फेस्टिवल में “शॉर्टनोवेल फिल्म ” और सन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल न्यूकॉन्सेप्ट फिल्म फेस्टिवल 2025 में “बेस्टनरेटिवशॉर्ट फिल्म ” के रूप में चुना गया। जिसके निर्माता निर्देशक होने के साथ- साथ सचिनखन्ना ने स्क्रीनप्ले और डायलॉगराइटिंग का भी काम बख़ूबी संभाला है।
अमेरिका में पहला प्रोडक्शन …….
सचिन बताते हैं कि उनका सफर वैसे तो वर्ष 2007 में शुरू हुआ था जब उन्होंने पहली बार कैमरा थामा था लेकिन अमेरिका में यह उनका पहला प्रोडक्शन था। पहले ही प्रयास में दो अन्तर्राष्ट्रीयपुरुस्कार मिल जाने से इतने सालों की मेहनत सार्थक हो गई। फिल्म रसायन विज्ञान से मानवता को शिक्षा देने वाली एक साधारण कहानी पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनाना है और एक अच्छा इंसान एक बेहतर समाज और राष्ट्र बन सकता है। सन फ्रांसिस्को और न्यूयार्क दोनों ही फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी ने फिल्म के सामाजिक दृष्टिकोण,मानवीय संदेश वोकहानी की वैचारिक सादगी को खूब सराहा। फिल्म में सह निर्माता जोशुआ और सभी साथियों का सराहनीय सहयोग रहा।
निरंतर चलती रही यात्रा…….
2007 से अब तक कैप्टन खन्ना की यात्रा निरंतर चल रही है। अभी तक कैप्टन सचिन 150+ कॉरपोरेट, ट्रेनिंग और इंडस्ट्रियल फ़िल्में कर चुके हैं। इनमें तीन कमर्शियल फ़िल्में, जिसमें एक फीचर फिल्म भी शामिल है। कई डॉक्यूमेंट्री और सामाजिक विषयों पर आधारित प्रोजेक्टनिर्मित और निर्देशित किए हैं।
उनका प्रोडक्शन हाउस बंजारा सिनेमा और उनका फ़िल्म फ़ेस्टिवल — बंजारा इंटरनेशनल टूरिंग फिल्म फेस्टिवल दुनिया भर के स्वतंत्र फ़िल्म निर्माताओं और विभिन्न सांस्कृतिक कहानियों को एक मंच देने का काम करता है। साथ ही चुनी हुई सर्वश्रेष्ठ फिल्मो की स्क्रीनिंग करता है। सचिनजबलपुर में भी 2017 में शहर का पहला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल आयोजित कर चुके हैं जिसे काफी सराहा गया था।
 
 
सायकल और समुद्र की लहरों तक का सफर …..
जबलपुर न केवल सचिन की जन्मस्थली है बल्कि यहां के मॉडल स्कूल से सचिन ने शिक्षा प्राप्त की है। स्कूल से निकलने के बाद मर्चेंटनेवी में कैप्टन बनना और फिर अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में आगे बढ़ते जाना एक अनोखी मिसाल कायम करता है। सचिन बताते हैं कि जब वे बेदी नगर स्थित अपने घर से सायकल पर सवार हो मॉडल स्कूल जाते थे तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि एक दिन उनकी ये यात्रा समुद्र की लहरों के बीच भी जा पहुंचेगी। मर्चेंटनेवी में रहते हुए जिंदगी के कई नए पहलुओं से सचिन का परिचय हुआ। कैप्टन के इन अनुभवों को उनकी फिल्मों, कहानियों में शिद्दत से महसूस किया जा सकता है। कैप्टन खन्ना हमेशा कहते हैं कि “मेरी जड़ें जबलपुर की है, यहीं से निर्मित हुई मेरी सोच और अंतर रचना मेरी कहानियों को रूप देती आई है।” सचिन ने बताया कि” द सोसाइटी ऑफ गुड ह्यूमेंस” मेरे दिल के बहुत करीब है। यह कहानी मुझे हमेशा याद दिलाती है कि दुनिया चाहे कितनी भी बदल जाए, अच्छाई कभी खत्म नहीं होती। इस फ़िल्म ने मुझे यह विश्वास दिया है कि भारतीय स्वतंत्र सिनेमा की आवाज़ अब दुनिया तक पहुंच रही है।
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Author: lokvaad@

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