जबलपुर। शहर के बड़े हिस्से की पेयजल व्यवस्था से जुड़े 120 एमएलडी रमनगरा जलशोधन संयंत्र में पिछले एक सप्ताह में बार-बार आई तकनीकी और बिजली संबंधी दिक्कतों से जलापूर्ति प्रभावित हुई है। 23 और 24 सितंबर को सुधार कार्य के लिए शटडाउन के बाद 26 सितंबर की शाम से 27 सितंबर की सुबह तक फिर जलापूर्ति प्रभावित रहने की सूचना जारी की गई। इस बार राइजिंग मेन लाइन में लगे 1200 एमएम बटरफ्लाई वाल्व में लीकेज को वजह बताया गया।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री जल कमलेश श्रीवास्तव के अनुसार, वाल्व का सुधार किया जाना था। इससे पहले भी सुधार कार्य और बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण रमनगरा संयंत्र से जुड़ी पानी की टंकियों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका।
कई इलाकों में जलापूर्ति पर असर
रमनगरा संयंत्र से जुड़ी जलापूर्ति प्रभावित होने का असर बिड़ला धर्मशाला, मेडिकल, त्रिपुरी, गुलौआ, राइट टाउन, रामेश्वरम्, मनमोहन नगर, लक्ष्मीपुर, कोतवाली, मोतीनाला, आनंद नगर, लेमा गार्डन, सर्वोदय नगर, मदर टेरेसा, बेदी नगर, मिल्क स्कीम, किलकारी गार्डन, न्यू शोभापुर और राजीव नगर सहित कई क्षेत्रों में बताया गया है। अमृत योजना की देवताल उच्चस्तरीय टंकियां भी इससे प्रभावित हुईं।
स्थानीय नागरिकों और पार्षदों का कहना है कि एक सप्ताह में बार-बार जलापूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समस्या के स्थायी समाधान की जगह बार-बार सुधार कार्य और वैकल्पिक रूप से टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है।
2021 में बनाई गई थी समानांतर लाइन
उपलब्ध पुराने नगर निगम रिकॉर्ड के अनुसार, नवंबर 2021 में रमनगरा संयंत्र की राइजिंग मेन लाइन में 1000 एमएम व्यास की समानांतर पाइपलाइन जोड़ने का काम किया गया था। उस समय नगर निगम की ओर से बताया गया था कि मुख्य लाइन में लीकेज होने की स्थिति में यह वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में काम करेगी।
इस समानांतर लाइन की लागत करीब 10 करोड़ रुपए बताई गई थी। ऐसे में मौजूदा लीकेज के दौरान इस वैकल्पिक व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मेंटेनेंस और प्लानिंग पर सवाल
बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि नियमित प्रिवेंटिव मेंटेनेंस समय पर हुआ या नहीं, लीकेज की संभावनाओं को पहले से चिन्हित किया गया था या नहीं और जरूरी स्पेयर पार्ट उपलब्ध थे या नहीं।इसके अलावा मरम्मत के बाद सिस्टम का पर्याप्त परीक्षण और बिजली आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इस पर भी नागरिक जवाब चाहते हैं।
टैंकरों से कब तक चलेगी व्यवस्था?
गर निगम की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि, इतने बड़े जलापूर्ति नेटवर्क में टैंकरों को आपातकालीन विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। नागरिकों की मांग है कि टैंकरों की संख्या, उनके फेरे, वितरित पानी की मात्रा और प्रभावित क्षेत्रों में उनकी पहुंच का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए, ताकि व्यवस्था की पारदर्शिता बनी रहे।
अमृत 2.0 से बढ़ेगी भविष्य की क्षमता
सितंबर 2026 में अमृत 2.0 के तहत 312 करोड़ रुपए की पेयजल योजना पर काम चल रहा है। रांझी संयंत्र की क्षमता 54 एमएलडी से बढ़ाकर 108 एमएलडी करने के लिए नया 54 एमएलडी संयंत्र बनाया जा रहा है। योजना का करीब 36 प्रतिशत काम पूरा होने और मई 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य बताए जाने की जानकारी दी गई है। भविष्य में इससे जलापूर्ति की क्षमता बढ़ सकती है, लेकिन फिलहाल रमनगरा संयंत्र से जुड़े क्षेत्रों में नियमित और भरोसेमंद जलापूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
बार-बार शटडाउन, लीकेज और बिजली संबंधी व्यवधान के बीच अब सवाल केवल किसी एक वाल्व या पाइप की खराबी का नहीं, बल्कि पूरे जलापूर्ति नेटवर्क की विश्वसनीयता और उसके रखरखाव की व्यवस्था का है। नागरिकों की अपेक्षा है कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उन्हें बार-बार टैंकरों या अगली सप्लाई के इंतजार पर निर्भर न रहना पड़े।



