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500 साल पुराने खडरा माता मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ रहे श्रद्धालु, 1997 से जल रही अखंड ज्योत

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जबलपुर। जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 52 किलोमीटर दूर, कटनी सीमा के पास स्थित खडरा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां माता की मूर्ति करीब 500 साल से एक विशाल चट्टान पर विराजमान है। नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

चरवाहों ने शुरू की थी पूजा की परंपरा

मंदिर के पुजारी पंडित अयोध्या प्रसाद बिलौन्हा के मुताबिक, पहले इस क्षेत्र में घना जंगल और झाड़ियां थीं। जंगली जानवरों के डर से यहां कम लोग आते थे। धार्मिक परंपरा के अनुसार, चरवाहों ने मूर्ति के आसपास साफ-सफाई की और नवरात्रि में जवारे बोकर पूजा-अर्चना शुरू की।

अष्टमी से जुड़ी है स्थानीय मान्यता

मंदिर से जुड़ी एक स्थानीय किंवदंती के अनुसार, अष्टमी के दिन पंडा बने एक बालक और बकरा बने दूसरे बालक से जुड़ी घटना हुई थी। मान्यता है कि धार्मिक अनुष्ठान और भजन-कीर्तन के बाद बालक फिर जीवित हो गया। स्थानीय लोग इस घटना को मंदिर की पूजा परंपरा की शुरुआत से जोड़ते हैं।

1997 से जल रही हैं दो अखंड ज्योत

मंदिर में वर्ष 1997 से दो अखंड ज्योत जल रही हैं। इनमें एक घी और दूसरी तेल की ज्योत है। मंदिर की देखरेख पुजारी अयोध्या प्रसाद बिलौन्हा और उनके पुत्र सनत बिलौन्हा करते हैं।

पुजारी और स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस चट्टान पर माता की मूर्ति विराजमान है, उसकी ऊंचाई करीब 25 फीट है। उनका दावा है कि चट्टान का आकार समय के साथ बढ़ रहा है।

मनोकामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में संतान प्राप्ति, विवाह, स्वास्थ्य और नौकरी से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए पूजा की जाती है। क्वांर की नवरात्रि में जवारे बोने और नवमी पर विसर्जन की परंपरा है। वैशाख की नवरात्रि में भी नौ दिनों तक श्रद्धालु पहुंचते हैं और मेला लगता है।

मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की प्रतिमा है। परिसर में काल भैरव, राम दरबार, राधा-कृष्ण और शंकर-पार्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

जबलपुर और सिहोरा से पहुंच सकते हैं मंदिर

खडरा माता मंदिर जबलपुर से करीब 52 किलोमीटर और सिहोरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है। कटनी जिले के बहोरीबंद से कुआं गांव होते हुए भी यहां पहुंचा जा सकता है।

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Author: lokvaad@

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