जबलपुर। जबलपुर संभाग के पांच जिलों के 34 नगरीय निकायों में कचरा प्रबंधन और डंपिंग यार्ड की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर कमियां सामने आने का दावा किया गया है। सर्वे के मुताबिक, किसी भी लैंडफिल साइट या डंपिंग यार्ड में मीथेन गैस डिटेक्टर नहीं मिला।
कचरे से निकलने वाली मीथेन गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है। इसकी निगरानी के लिए जरूरी उपकरणों की कमी से आग लगने और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
कठौंदा और रानीताल में जमा हुआ था कचरा
जबलपुर में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट होने के कारण नई लैंडफिल साइट नहीं बनाई जा रही है। हालांकि, पिछले वर्ष प्लांट बंद रहने के दौरान कठौंदा में महीनों तक शहर का कचरा जमा होता रहा था। वहीं, रानीताल में खेल मैदान के पास करीब पांच दशक तक कचरे का बड़ा ढेर बना रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने यहां से कचरा हटाकर उसका प्रसंस्करण किया है।
चार जिलों में कचरा प्रबंधन की कमियां
सर्वे में मंडला, डिंडौरी, नरसिंहपुर और बालाघाट में कचरा संग्रहण, परिवहन, पृथक्करण और निपटान व्यवस्था में कमियां सामने आने की बात कही गई है। इसके अलावा, जबलपुर को छोड़कर संभाग के अन्य नगरीय निकायों में वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक सहमति प्राप्त नहीं होने का भी उल्लेख किया गया है।
लीचेट और बारिश के पानी की निकासी पर भी चिंता
सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर और बालाघाट की नगर पालिका परिषदों के ट्रेंचिंग ग्राउंड में बारिश के पानी की निकासी और लीचेट प्रबंधन की व्यवस्था खराब पाई गई। लीचेट वह दूषित तरल है, जो कचरे से होकर गुजरने वाले पानी के कारण बन सकता है। उचित प्रबंधन नहीं होने पर इससे मिट्टी और भूजल प्रभावित होने का खतरा रहता है।
सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
डंपिंग यार्ड में गैस की निगरानी, आग से बचाव और दूषित पानी के प्रबंधन की व्यवस्था कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। ऐसे में सर्वे में सामने आई कमियों को दूर करने और संबंधित नगरीय निकायों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।







