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सड़कों पर ड्राइविंग स्कूल : व्यस्त मार्गों पर प्रशिक्षण से सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

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सड़कों पर ड्राइविंग स्कूल : सुरक्षा से खिलवाड़, हादसों को न्योता!

रोहित विश्वकर्मा, जबलपुर

जबलपुर शहर में ड्राइविंग स्कूलों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है, लेकिन प्रशिक्षण के नाम पर लोगों की सुरक्षा और जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। सुरक्षित ट्रैक या खाली मैदान के बजाय व्यस्त और सरपट दौड़ते ट्रैफिक वाले मार्गों पर नौसिखियों को स्टेयरिंग थमाई जा रही है। जबलपुर शहर में ड्राइविंग स्कूलों के संचालन और प्रशिक्षण के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ ड्राइविंग स्कूल सुरक्षित ट्रेनिंग ट्रैक या खाली मैदान के बजाय व्यस्त और तेज ट्रैफिक वाले मार्गों पर नौसिखिए चालकों को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान नए चालक के लिए वाहन पर नियंत्रण बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में व्यस्त सड़कों पर प्रशिक्षण देने से प्रशिक्षु के साथ-साथ आसपास चल रहे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। ड्राइविंग स्कूलों से जुड़ी एक और चिंता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। सवाल उठ रहा है कि प्रशिक्षण वाहनों में ड्युअल कंट्रोल ब्रेक और क्लच सिस्टम की नियमित तकनीकी जांच होती है या नहीं। साथ ही, प्रशिक्षकों की योग्यता और आवश्यक लाइसेंस की जांच तथा ट्रेनिंग ग्राउंड की उपलब्धता को लेकर भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि शुरुआती ड्राइविंग प्रशिक्षण निर्धारित सुरक्षित मैदान या ट्रेनिंग ट्रैक पर कराया जाए। इसके साथ ही संबंधित विभाग द्वारा प्रशिक्षण वाहनों, ड्युअल कंट्रोल सिस्टम, प्रशिक्षकों की योग्यता और ट्रेनिंग सुविधाओं की नियमित जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित ड्राइविंग स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।

  • व्यस्त सड़कों पर ट्रेनिंग : मैदान या ट्रेनिंग ट्रैक की जगह सीधे मुख्य मार्गों और भारी ट्रैफिक के बीच नौसिखियों को वाहन चलाना सिखाया जा रहा है।
  • बड़ा हादसा होने का जोखिम : पहली बार स्टेयरिंग संभाल रहे प्रशिक्षु घबराहट में ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दबा दें या नियंत्रण खो दें, तो आसपास चल रहे अन्य वाहन चालक और राहगीर सीधे खतरे में आ जाते हैं।
  • फीस पूरी, सुरक्षा अधूरी : ड्राइविंग स्कूल संचालक मोटी फीस तो वसूल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों और बुनियादी ट्रेनिंग स्पेस को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।
  • निगरानी तंत्र गायब : परिवहन विभाग और जिम्मेदार तंत्र की ढिलाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन वाहनों के ड्युअल कंट्रोल सिस्टम, इंस्ट्रक्टर्स की योग्यता और ट्रेनिंग ग्राउंड्स की नियमित जांच हो रही है?

⚠️ क्या होना चाहिए सुधार?

  • सुरक्षित ट्रेनिंग ट्रैक: शुरुआती ट्रेनिंग केवल निर्धारित खाली मैदान या ड्राइविंग ट्रैक पर ही दी जाए।
  • सख्त जांच व्यवस्था: वाहनों के ‘ड्युअल कंट्रोल ब्रेक/क्लच’ और इंस्ट्रक्टर्स के लाइसेंस की तकनीकी जांच हो।
  • प्रशासनिक कार्रवाई: नियम तोड़कर व्यस्त सड़कों पर खतरा पैदा करने वाले ड्राइविंग स्कूलों पर परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई करे।
lokvaad@
Author: lokvaad@

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